Monday, December 5, 2011

मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया...



"मौत ये ख़याल है जैसे जिंदगी ये ख़याल है !

न सुख है , न दुःख है ! न दीन है , न दुनिया !

न इंसान , न भगवान् !

सिर्फ मै हूँ , मै हूँ , मै हूँ, मै हूँ -मैं - सिर्फ मैं ! "

देवानंद अब हमारे बीच इस दुनिया में नहीं रहे... पर उन जैसे जिंदादिल इन्शान की गैरमौजूदगी भी हमें जिंदगी में पूरे जोशो खरोश से मौजूद रहने को हमेशा हौशला देती रहेगी । बोहोत सालों पहले जब मैं हर रविवार 'The Times of India' [ 'Sunday edition'] रेगुलर पढ़ा करता था । मुझे अब भी याद है जब अपने करियर के शुरुआती दौर में अपने तनख्वा में से उन्होंने एक साइकिल और किताबें खरीदीं थी । वो संस्करण अभी भी मेरे पास है।


उनकी मैंने बोहोतों फ़िल्मी देखीं हैं पर 'GUIDE' सबसे ज्यादा याद रही।

उनकी जिंदगी एक खुली किताब है और उनके खुशनुमा मिजाज़ के हम कायल हैं । कहते हैं की वो ऐसे कलाकार थे जो अपनी अशफलता का कभी मातम नहीं मनाते मिले...बल्कि उनकी पार्टियों की रौनक देख सभी हैरत में होते ...उनके लिए फिल्म बनाने में जो मज़ा /आनंद है वो ज्यादा कीमती है बजाये इसके की वो बॉक्स ऑफिस पे कितनी चली... मुझे लगता है की उनकी स्तिथि 'समत्व' / 'स्तिथ्प्रग्य' सी थी...




इस महान फनकार की याद में सुनिए उनकी एक फिल्म का ये गीत...




ॐ शांति शांति शांति !!!

About Me

Hi, I'm a simple man who wants to be friend with nature and all around. I welcome you to be in tune with yourself only...keep smiling! :)

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